ATH NEWS 11:-ये जो चौड़े होकर चल रहे हैं न, सफेद ट्रैक सूट में, दूसरी वाली तस्वीर भी इनकी ही है। पिछले साल इन्हें यूपी पुलिस की एक प्रतियोगिता में क्राइम इन्वेस्टीगेशन के लिए प्रथम स्थान का इनाम मिला था।
आज इनको 4 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है। सफेद ट्रैक सूट वाली तस्वीर उसी दौरान की है, जब इन्हें मेरठ में एंटी करप्शन की टीम पकड़ कर ले जा रही है। बॉडी लैंग्वेज से जाहिर ही नहीं हो रहा है कि करप्शन में पकड़े गए हैं।
हां तो इनका नाम महेंद्र सिंह है। हापुड़ जिले में क्राइम ब्रांच में इंस्पेक्टर हैं। हापुड़ के कई थानों में इंचार्ज भी रह चुके हैं। वहीं के एक हत्याकांड से जुड़े मामलों में आरोपी पक्ष का मामला हलका करने के लिए रिश्वत मांग रहे थे। आरोपी पक्ष का कहना था कि वह बेकसूर हैं। पुलिस की जांच में भी यह साफ हो चुका था।
लेकिन, यह वाले इंस्पेक्टर साहब, अपनी रिपोर्ट में क्लीन चिट देने से पहले नजराना मांग रहे थे। पिछले तीन साल के दौरान आरोपी पक्ष से करीब ढाई लाख रुपये वसूल भी चुके थे। अब इनका पेट बड़ा हो गया था। इसलिए मुंह ज्यादा खोल लिया और मांग बैठे, 4 लाख।
बिना कुसूर के ही मुकदमे में फंसने और जांच में बचने के बावजूद के ढाई लाख रुपये देने वालों का मन इस बार बदल गया। इनकी अक्ल ठिकाने लगाने के लिए एंटी करप्शन टीम से कांटैक्ट किया। टीम ने मामले की तफ्तीश की, केस में दम दिखा।
फिर क्या था, खाका बुना गया। उसी के तहत इंस्पेक्टर को ट्रैप किया गया। इंस्पेक्टर आज बाकायदा छुट्टी लेकर रुड़की से मेरठ पहुंच गए, रिश्वत की रकम लेने के लिए। पहले से तय जगह पर मिलन हुआ। देने वाले बाकायदा जूते के डिब्बे में रुपये का बंडल पकड़ाया। इंस्पेक्टर के हाथ में रकम पहुंचते ही एंटी करप्शन टीम ने दबोच लिया।
फिर वही हुआ, हाथ को पानी से धुलवाया गया। चूंकि नोटों पर केमिकल चढ़ा हुआ था, इसलिए हाथ पर पानी पड़ते ही उसने रंग छोड़ दिया। पकड़े जाने के बाद खाकी का रुतबा दिखाया। धौंस जमाई। खूब ऐंठे। मामला सेट करना चाहा। लेकिन घड़ा भर चुका था। बैठा लिए गए एंटी करप्शन टीम की गाड़ी पर।
थाना पहुंचे तो चाल ऐसी कि फिर से दूसरी तस्वीर की मानिंद कोई तमगा जीत कर आ रहे हों।
यह तो थी आज की कहानी....
पुलिस महकमे को शर्मसाल करने वाली एक और बदनुमा पहचान भी इनके ही नाम है। आपको 2016 में बुलंदशहर में एक मां और उसकी नाबालिग लड़की से रेप और लूटकांड याद होगा। अभी तीन दिन पहले ही बुलंदशहर की अदालत ने उस के पांच आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
इस केस की शुरुआती तफ्तीश यही महेंद्र सिंह कर रहे थे। मामला तूल पकड़ चुका था। तब घटना के कुछ दिन बाद इन्होंने फर्जी आरोपियों को खड़ाकर मामले का खुलासा कर दिया था। तब इनके कप्तान यानी बुलंदशहर के एसएसपी वैभव कृष्ण थे। वही जो अब यूपी के डीजीपी हैं। इनकी बनाई थ्योरी पूरी तरह से गलत साबित हो गई।
इनकी ही कारिस्तानी से तब पुलिस की किरकिरी और सरकार की फजीहत हुई थी। इन्हें सस्पेंड कर दिया गया था। तब के एसएसपी वैभव कृष्ण भी कार्रवाई की जद में आए थे। बाद में मामला सीबीआई तक पहुंचा। उसके बाद जांच हुई तो कई आरोपी पकड़े गए। कन्नौज और फर्रुखाबाद के भी थे।
यानी की वर्दी को शर्मसार करने का ठेका लेने का इनका पुराना शौक है...।
