महराजगंज:-झांसी में कुशीनगर एक्सप्रेस ट्रेन में एक यात्री की 2 जनवरी को मौत हो गई। उसका साथी लाश छोड़कर भाग गया। पुलिस ने यात्री के पास मिले कागजों से उसकी पहचान की। इसके बाद महराजगंज में रहने वाले उसके बेटे को सूचना दी गई।
लेकिन, बेटे के पास महराजगंज से झांसी आने के लिए पैसे नहीं थे। इसके बाद उसने अपने गांववालों से करीब 20 हजार रुपए का चंदा इकट्ठा किया। फिर 2 दिन बाद (रविवार को) करीब 700 किलोमीटर का सफर तय करके पिता का शव को अपने घर लाया।पंचम महराजगंज के बृजमनगंज थाना क्षेत्र में सौरहा गांव है। यहां पंचम कनौजिया (51) रहते थे। वह रोजी-रोटी कमाने मुंबई गए थे, जहां बीमार हो गए। इसके बाद ट्रेन से घर लौट रहे थे। साथ में उनका एक दोस्त भी था। यात्रा के दौरान ट्रेन में ही पंचम की तबीयत बिगड़ गई। शुक्रवार रात जब तक कुशीनगर एक्सप्रेस झांसी रेलवे स्टेशन पहुंची, तब तक उनकी सांसें भी रुक गईं। इसके बाद पंचम को झांसी रेलवे स्टेशन पर उतारा गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पंचम के साले सर्वेश कुमार ने बताया- मेरे जीजा मुंबई में एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करते थे। 4 महीने पहले ही वह घर से कमाने आए थे। कुछ दिनों से उनकी तबीयत खराब थी। इसलिए वे कुशीनगर एक्सप्रेस से घर आ रहे थे। उनके साथ पड़ोस के गांव में रहने वाला एक युवक भी था।
झांसी पहुंचने से पहले जीजा की तबीयत बिगड़ गई। उसके बाद लोगों ने रेलवे कंट्रोल रूम को सूचना दी। शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे ट्रेन झांसी रेलवे स्टेशन पहुंची। यहां पर मेडिकल टीम ने जीजा को मृत घोषित कर दिया।झांसी आने के लिए पैसे नहीं थे
साले सर्वेश ने बताया- शुक्रवार देर रात करीब 12 बजे झांसी जीआरपी से फोन आया कि पंचम की मौत हो गई। हमारे परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। झांसी की दूरी लगभग 700 किलोमीटर दूर थी। यहां आने के लिए हम लोगों के पास पैसे नहीं थे। इसलिए हम लोग रात में रवाना नहीं हो सके।
सुबह पंचम का बेटा प्रदीप गांव के प्रधान और अन्य गांववालों के पास गया। प्रधान और गांववालों ने चंदा इकट्ठा करके प्रदीप को 20 हजार रुपए दिए। तब तक हम लोग भी पहुंच गए और उसकी मदद की। इसके बाद 18 हजार रुपए में पिकअप गाड़ी करके हम लोग झांसी रवाना हुए। आज सुबह सब लोग झांसी पहुंचे। अब जीजा की लाश लेकर घर जाएंगे।प्रदीप ने कहा- चंदा न मिलता तो शव लेने झांसी नहीं आ पाते प्रदीप ने बताया- मेरे पिता की कमाई से घर चलता था। हम 2 भाई और 1 बहन हैं। बड़ी बहन प्रियंका (20) ने पढ़ाई छोड़ दी। अब वह घर पर रहती है। पिता को बहन की शादी करनी थी। मैं कक्षा-12 और छोटा भाई आदित्य 9वीं में पढ़ते हैं। हमारे परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। अगर चंदा न मिलता तो हम लोग पिता की लाश लेने झांसी भी नहीं आ पाते।
प्रभारी महराजगंज
कैलाश सिंह

