महाराजगंज :-सदर तहसील अंतर्गत ग्राम सभा भीसवा में शासन-प्रशासन के तमाम दावों की पोल खोलती एक मार्मिक तस्वीर सामने आई है। नहर के किनारे बीते लगभग 25 वर्षों से झुग्गी-झोपड़ी में जीवन गुजार रहे 60 वर्षीय लालजी पुत्र सुखल, अपने 6 बेटों और करीब 30 सदस्यों के कुनबे के साथ आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
सरकार की ओर से गरीबों के लिए आवास, राशन, पेंशन, आयुष्मान और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन यह कुनबा अब तक सरकारी नजर से ओझल बना हुआ है। न इनके पास रहने के लिए जमीन है, न पक्का घर, और न ही किसी योजना का लाभ। कड़ाके की धूप हो या हाड़ कंपा देने वाली ठंड—यह परिवार हर मौसम की मार झेलते हुए ठिठुरती जिंदगी जीने को मजबूर है।
लालजी आज भी भिक्षाटन कर परिवार का पेट पालने का प्रयास कर रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों की स्थिति और भी चिंताजनक है। नहर किनारे असुरक्षित झोपड़ी में रहना हर वक्त खतरे को दावत देता है, बावजूद इसके प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस परिवार को आवासीय भूमि, पक्का घर और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल जाए तो उनकी जिंदगी की दिशा बदल सकती है। सवाल यह है कि जब सरकार “सबका साथ, सबका विकास” का नारा देती है, तो फिर ग्राम सभा भीसवा का यह कुनबा विकास की मुख्यधारा से क्यों अब भी दूर है?
अब देखना यह है कि संबंधित अधिकारी इस खबर के बाद जागते हैं या फिर यह परिवार यूं ही उपेक्षा और अभाव के साए में जीवन गुजारने को मजबूर रहेगा।
प्रभारी महराजगंज
कैलाशसिंह
