विश्रामपुर थाना से श्रवण कुमार रवि के रिपोर्ट ।
एटीएच न्यूज़ 11:- मेदिनीनगर सदर मेदिनीनगर के न्यायालय कार्यपालक दंडाधिकारी द्वारा जारी नोटिस को लेकर स्थानीय पत्रकार मोहम्मद सफी ने गंभीर आपत्ति जताई है। नोटिस में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 126 के तहत नगर निकाय चुनाव 2026 के दौरान शांति भंग की आशंका व्यक्त करते हुए न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
मोहम्मद सफी का कहना है कि उन्हें यह नोटिस जारी होने के तीन दिन बाद एक व्यक्ति के माध्यम से प्राप्त हुआ, जबकि नियमों के अनुसार नोटिस की विधिवत तामिला की जानी चाहिए थी। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर उन्हें प्रत्यक्ष रूप से सूचना क्यों नहीं दी गई।
सफी ने यह भी स्पष्ट किया कि वे नगर परिषद क्षेत्र के निवासी नहीं हैं। उनका घर नगर परिषद क्षेत्र से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित है। ऐसे में चुनाव के दौरान उनके द्वारा शांति भंग किए जाने की आशंका जताना पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन है।
सफी एक स्वतंत्र पत्रकार हैं और झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के सक्रिय सदस्य है, वह लंबे समय से जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। उनके अनुसार, यह कार्रवाई उन्हें डराने, मानसिक दबाव बनाने और उनकी छवि धूमिल करने की नीयत से की गई प्रतीत होती है। “मैंने हमेशा निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता की है। यदि सच दिखाना किसी को असुविधाजनक लगता है, तो यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है,” सफी ने कहा।
यह सर्वविदित है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार प्राप्त है।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कानून और न्यायालय का पूरा सम्मान करते हैं और निर्धारित तिथि पर उपस्थित होकर अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे।
इस मामले को लेकर स्थानीय पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों का मानना है कि लोकतंत्र में पत्रकारों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और किसी भी प्रकार का दबाव अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
अब सभी की निगाहें आगामी न्यायालयीय सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।

